General Knowledge · GK
हिंदू दर्शन के संदर्भ में, पुरुषार्थों में धर्म का क्या अर्थ है?
- 1पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति
- 2इंद्रिय सुख और भोग
- 3धन और समृद्धि
- 4धार्मिक आचरण, नैतिक कर्तव्य और ब्रह्मांडीय व्यवस्था✓
सही उत्तर देखें
धार्मिक आचरण, नैतिक कर्तव्य और ब्रह्मांडीय व्यवस्था
व्याख्या
सही उत्तर:
- (A) धार्मिक आचरण, नैतिक कर्तव्य और ब्रह्मांडीय व्यवस्था
विस्तृत स्पष्टीकरण और मुख्य बिंदु:
पुरुषार्थ की अवधारणा: हिंदू दर्शन में मानव जीवन के चार मुख्य लक्ष्यों या उद्देश्यों को 'पुरुषार्थ' कहा गया है, जो हैं: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
धर्म का महत्व: पुरुषार्थों में 'धर्म' को पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका अर्थ केवल पूजा-पाठ से नहीं है, बल्कि यह नैतिक कर्तव्यों (Righteousness), धार्मिक आचरण, सत्य, न्याय और समाज व ब्रह्मांड की व्यवस्था को बनाए रखने वाले नियमों को दर्शाता है। यह जीवन को संतुलित तरीके से जीने का मार्गदर्शक है।
अन्य विकल्पों का वर्गीकरण:
धन और समृद्धि: यह 'अर्थ' पुरुषार्थ को दर्शाता है।
इंद्रिय सुख और भोग: यह 'काम' पुरुषार्थ को दर्शाता है।
पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति: यह अंतिम पुरुषार्थ 'मोक्ष' को दर्शाता है।
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