History · Ancient Indian History
हालांकि शून्यता की अवधारणा पहले से मौजूद थी, किस प्राचीन भारतीय गणितज्ञ-खगोलशास्त्री ने अपने ग्रंथ 'ब्राह्मस्फुटसिद्धांत' में 'शून्य' के साथ गणितीय संक्रियाओं के औपचारिक नियम दिए थे?
- 1आर्यभट्ट
- 2वराहमिहिर
- 3ब्रह्मगुप्त✓
- 4भास्कर द्वितीय
सही उत्तर देखें
ब्रह्मगुप्त
व्याख्या
स्पष्टीकरण:
सही उत्तर:
- (C) ब्रह्मगुप्त
मुख्य बिंदु:
ग्रंथ और योगदान: महान भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री ब्रह्मगुप्त ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'ब्राह्मस्फुटसिद्धांत' (रचना वर्ष: 628 ईस्वी) में शून्य (0) को एक स्वतंत्र संख्या के रूप में मान्यता दी और शून्य के साथ जोड़, घटाव, गुणा व भाग जैसी गणितीय संक्रियाओं (Operations) के औपचारिक और व्यवस्थित नियम दुनिया के सामने रखे।
आर्यभट्ट: इन्होंने 'आर्यभट्रीयम्' ग्रंथ लिखा और शून्य की अवधारणा व स्थान-मान प्रणाली (Place-value system) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, परंतु शून्य के साथ गणितीय संक्रियाओं के विधिवत नियम सबसे पहले ब्रह्मगुप्त ने ही दिए थे।
वराहमिहिर और भास्कर द्वितीय: वराहमिहिर एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे (जिन्होंने 'बृहत्संहिता' लिखी), और भास्कर द्वितीय (भास्कराचार्य) ने 'सिद्धान्तशिरोमणि' की रचना की थी।
Download Single Question PDF
Save this question and verified answer as a clean study sheet with live clickable link.
Share with Friends & Study Groups
Challenge your peer aspirants on WhatsApp or Telegram to solve this question!
Preparing for History?
Practice full-length History mock tests with real exam timers, instant score analysis, and all-India ranking.
Want more practice questions on Ancient Indian History?
Solve complete topic-wise tests with detailed solutions on GkGet.
Related Practice Questions
Recommended practice questions in History · Ancient Indian History