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वह अनुपात कौन सा है जिसे बैंकों को अपनी शुद्ध मांग एवं सावदी देयदारियों के लिए तरल परिसंपत्तियों के रूप में बनाए रखना होता है, के रूप में जाना जाता है?
- 1विपरीत रेपो दर
- 2रेपो दर
- 3वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)✓
- 4नकद आरक्षित अनुपात (CRR)
सही उत्तर देखें
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)
व्याख्या
प्रश्न: वह अनुपात कौन सा है जिसे बैंकों को अपनी शुद्ध मांग एवं सावदी देयदारियों के लिए तरल परिसंपत्तियों के रूप में बनाए रखना होता है, के रूप में जाना जाता है?
सही उत्तर:
- (B) वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)
विस्तृत स्पष्टीकरण:
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR
- - Statutory Liquidity Ratio): यह वह न्यूनतम प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल शुद्ध मांग और सावदी देयदारियों (Net Demand and Time Liabilities
- NDTL) का एक निश्चित हिस्सा तरल परिसंपत्तियों (जैसे नकदी, सोना या अनुमोदित प्रतिभूतियों) के रूप में अपने पास सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है।
अन्य विकल्पों का अर्थ:
नकद आरक्षित अनुपात (CRR): यह वह राशि है जो बैंकों को केंद्रीय बैंक (रिजर्व बैंक) के पास नकद के रूप में रखनी होती है।
रेपो दर (Repo Rate): यह वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
विपरीत रेपो दर (Reverse Repo Rate): यह वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों से अल्पकालिक ऋण स्वीकार करता है।
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