Geography · Agriculture
यदि जीवन-निर्वाह कृषि पद्धतियां गंभीर पर्यावरणीय परिवर्तनों के अनुकूल होने में विफल रहती हैं, तो निम्नलिखित में से कौन सा प्रत्यक्ष परिणाम होगा?
- 1लाभदायक वाणिज्यिक खेती में तत्काल परिवर्तन
- 2प्रति हेक्टेयर अधिक उपज
- 3फसल विविधता में स्वतः वृद्धि
- 4मृदा की उर्वरता में कमी और खाद्य असुरक्षा✓
सही उत्तर देखें
मृदा की उर्वरता में कमी और खाद्य असुरक्षा
व्याख्या
सही उत्तर:
- (A) मृदा की उर्वरता में कमी और खाद्य असुरक्षा
विस्तृत स्पष्टीकरण:
पर्यावरणीय अनुकूलन का अभाव: पारंपरिक कृषि पूरी तरह से प्रकृति और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है। यदि जलवायु परिवर्तन, वर्षा में अनिश्चितता या अन्य पर्यावरणीय बदलावों के अनुसार कृषि पद्धतियों में बदलाव न किया जाए, तो कृषि प्रणाली चरमरा जाती है।
प्रत्यक्ष परिणाम: इसके परिणामस्वरूप मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता नष्ट होने लगती है, पैदावार लगातार घटती जाती है, और अंततः किसानों के पास परिवार के भरण-पोषण के लिए भी पर्याप्त अनाज नहीं बचता, जिससे गंभीर खाद्य असुरक्षा उत्पन्न होती है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
अनुकूलन में विफलता से स्वतः फसल विविधता या उपज में वृद्धि नहीं होती, न ही यह किसी लाभदायक वाणिज्यिक खेती में स्वतः परिवर्तन का कारण बनता है, बल्कि इससे संकट उत्पन्न होता है।
Download Single Question PDF
Save this question and verified answer as a clean study sheet with live clickable link.
Share with Friends & Study Groups
Challenge your peer aspirants on WhatsApp or Telegram to solve this question!
Preparing for Geography?
Practice full-length Geography mock tests with real exam timers, instant score analysis, and all-India ranking.
Want more practice questions on Agriculture?
Solve complete topic-wise tests with detailed solutions on GkGet.
Related Practice Questions
Recommended practice questions in Geography · Agriculture