Current Affairs · Banking Regulation
माइक्रोफाइनेंस ऋणों के लिए आरबीआई के नियामक ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन 1: किसी ऋण को माइक्रोफाइनेंस ऋण के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए, यह संपार्श्विक-मुक्त (collateral-free) होना चाहिए और उधारकर्ता के परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में 3 लाख रुपये की समान सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। कथन 2: ढांचा यह निर्धारित करता है कि एक परिवार की कुल मासिक ऋण पुनर्भुगतान देनदारियां उसकी मासिक आय के 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसमें औपचारिक और अनौपचारिक दोनों स्रोतों से सभी मौजूदा ऋण शामिल हैं। कथन 3: विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) को माइक्रोफाइनेंस ऋणों पर कोई पूर्व-भुगतान जुर्माना (prepayment penalty) लगाने से प्रतिबंधित किया गया है और उन्हें वार्षिक प्रतिशत दर (APR) प्रदर्शित करने वाला एक मानकीकृत 'की फैक्ट्स स्टेटमेंट' (KFS) प्रदान करना होगा। निम्नलिखित में से कौन सा इन कथनों की वैधता का सही वर्णन करता है?
- 1केवल कथन 3 सही है, क्योंकि अन्य कथनों को पूरी तरह से संशोधित किया गया है।
- 2तीनों कथन सही हैं और आरबीआई के माइक्रोफाइनेंस नियमों का मूल हिस्सा हैं।✓
- 3कथन 2 और कथन 3 सही हैं, लेकिन कथन 1 गलत है।
- 4केवल कथन 1 और कथन 3 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है।
सही उत्तर देखें
तीनों कथन सही हैं और आरबीआई के माइक्रोफाइनेंस नियमों का मूल हिस्सा हैं।
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