Economics · Macroeconomic Policy & Foreign Trade
मंदी के चरण के दौरान, सरकारें आमतौर पर मांग को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशिष्ट राजकोषीय रुख अपनाती हैं। हालांकि यह दृष्टिकोण गुणक प्रभाव के माध्यम से राष्ट्रीय आय बढ़ाता है, यह आयातित वस्तुओं की मांग को उत्तेजित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आर्थिक प्रतिमान इस प्रक्रिया में राज्य की भूमिका पर विरोधाभासी विचार पेश करते हैं। निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प मंदी की स्थितियों से जुड़ी राजकोषीय नीति, चालू खाता संतुलन पर इसके विशिष्ट प्रभाव और क्लासिकल आर्थिक दृष्टिकोण के अनुसार सरकार की भूमिका की सही पहचान करता है?
- 1अधिशेष बजट नीति; चालू खाता संतुलन को खराब करती है; निष्क्रिय (बाजार स्वतः ठीक होते हैं)
- 2विस्तारवादी (मुद्रास्फीतिकारी) नीति; चालू खाता संतुलन में सुधार करती है; सक्रिय (राजकोषीय हस्तक्षेप आवश्यक)
- 3संकुचनकारी (अवस्फीतिकारी) नीति; चालू खाता संतुलन में सुधार करती है; सक्रिय (राजकोषीय हस्तक्षेप आवश्यक)
- 4विस्तारवादी (मुद्रास्फीतिकारी) नीति; चालू खाता संतुलन को खराब करती है; निष्क्रिय (बाजार स्वतः ठीक होते हैं)✓
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विस्तारवादी (मुद्रास्फीतिकारी) नीति; चालू खाता संतुलन को खराब करती है; निष्क्रिय (बाजार स्वतः ठीक होते हैं)
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