Indian Polity · Indian Independence Act 1947
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार, नया संविधान बनने तक संविधान सभा को क्या दोहरा कार्य सौंपा गया था?
- 1अस्थायी संसद के रूप में कार्य करना और पहले प्रधान मंत्री की नियुक्ति करना
- 2संविधान का मसौदा तैयार करना और रियासतों का सीधे प्रबंधन करना
- 3केवल संविधान बनाना और कार्यवाहक सरकार के रूप में कार्य करना
- 4संविधान बनाने वाली संस्था और केंद्रीय विधायिका के रूप में कार्य करना✓
सही उत्तर देखें
संविधान बनाने वाली संस्था और केंद्रीय विधायिका के रूप में कार्य करना
व्याख्या
प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार, नया संविधान बनने तक संविधान सभा को क्या दोहरा कार्य सौंपा गया था?सही उत्तर:
- (A) संविधान बनाने वाली संस्था और केंद्रीय विधायिका के रूप में कार्य करना
विस्तृत स्पष्टीकरण:
दोहरे कार्य की प्रकृति: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के लागू होने के बाद, संविधान सभा को दो प्रमुख और अलग-अलग भूमिकाएं निभानी थीं।
संविधान निर्माण: पहली भूमिका देश के लिए एक नए और स्वतंत्र संविधान का निर्माण करना था (जिसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे)।
केंद्रीय विधायिका (संसद): दूसरी भूमिका स्वतंत्र भारत के लिए साधारण कानून बनाना और देश की केंद्रीय संसद (अस्थाई विधायिका) के रूप में कार्य करना था (जब इस रूप में बैठक होती थी, तब इसकी अध्यक्षता जी. वी. मावलंकर करते थे)।
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