General Studies · Collateral and Securities
भारत में संपार्श्विक प्रतिभूतियों (collateral securities) के बैंकिंग और कानूनी पहलुओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: कथन 1: 'बंधक' (Mortgage) को संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 58 के तहत परिभाषित किया गया है। एक न्यायसंगत बंधक (Equitable Mortgage) में सुरक्षा बनाने के इरादे से लेनदार को स्वामित्व विलेख सौंपना शामिल है। कथन 2: संपार्श्विक प्रतिभूतियों को प्राथमिक सुरक्षा (बैंक वित्त से निर्मित संपत्ति) और द्वितीयक सुरक्षा (अतिरिक्त गिरवी रखी गई संपत्ति जैसे सावधि जमा) में वर्गीकृत किया गया है। कथन 3: प्रतिभूतियों को चार्ज करने में 'सेट-ऑफ' (समान अधिकार में खातों को संयोजित करने का वैधानिक अधिकार) और 'असाइनमेंट' (संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 130 के तहत एक अभियोज्य दावे का हस्तांतरण) शामिल है। निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है?
- 1केवल कथन 2 सही है, क्योंकि कथन 3 सेट-ऑफ की परिभाषा को बैंकर के ग्रहणाधिकार (Lien) के साथ भ्रमित करता है।
- 2तीनों कथन सही हैं और भारतीय बैंकिंग में संपार्श्विक को चार्ज करने का सटीक विवरण प्रदान करते हैं।✓
- 3कथन 2 और 3 सही हैं, लेकिन कथन 1 संपत्ति अंतरण अधिनियम की शासी धारा की गलत पहचान करता है।
- 4कथन 1 गलत है क्योंकि न्यायसंगत बंधक को बिना किसी अपवाद के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
सही उत्तर देखें
तीनों कथन सही हैं और भारतीय बैंकिंग में संपार्श्विक को चार्ज करने का सटीक विवरण प्रदान करते हैं।
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