Biology · Organ Transplantation
भारत में मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत, यदि कोई पूर्व प्रतिज्ञा मौजूद नहीं है, तो एक मृत वयस्क दाता से अंग निकालने के लिए किसका परामर्श/सहमति अनिवार्य है?
- 1केवल उपचार करने वाले चिकित्सक की
- 2निकट संबंधी या मृत शरीर का वैध कब्जा रखने वाले व्यक्ति की✓
- 3प्रभारी स्थानीय पुलिस अधिकारी की
- 4अस्पताल प्रशासन बोर्ड की
सही उत्तर देखें
निकट संबंधी या मृत शरीर का वैध कब्जा रखने वाले व्यक्ति की
व्याख्या
सही उत्तर:
- (B) निकट संबंधी या मृत शरीर का वैध कब्जा रखने वाले व्यक्ति की
विस्तृत स्पष्टीकरण:
सहमति का नियम: मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में अंग दान के लिए कोई लिखित प्रतिज्ञा (Pledge) या सहमति नहीं दी है, तो उसकी मृत्यु के पश्चात उसके अंगों को निकालने के लिए उसके निकट संबंधियों (जैसे पति/पत्नी, माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन) से अनुमति लेनी अनिवार्य होती है।
वैध कब्जा: यदि कोई निकट संबंधी उपलब्ध न हो, तो वह व्यक्ति या संस्था जिसके पास मृत शरीर का वैध कब्जा है, कानून द्वारा निर्धारित नियमों के तहत अंगदान के लिए अधिकृत प्राधिकार प्रदान कर सकता है।
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