Indian Polity · Polity Science
भारत में जनहित याचिका (पीआईएल) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक है?
- 1पीआईएल को भारतीय न्यायिक प्रणाली द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है।
- 2पीआईएल केवल सरकारी संगठनों द्वारा दायर की जा सकती है।
- 3पीआईएल केवल उन व्यक्तियों द्वारा दायर की जा सकती है जो सीधे तौर पर मुद्दे से प्रभावित हैं।
- 4पीआईएल किसी भी व्यक्ति द्वारा जनता की ओर से दायर की जा सकती है, भले ही वे सीधे तौर पर प्रभावित न हों।✓
सही उत्तर देखें
पीआईएल किसी भी व्यक्ति द्वारा जनता की ओर से दायर की जा सकती है, भले ही वे सीधे तौर पर प्रभावित न हों।
व्याख्या
भारत में जनहित याचिका (Public Interest Litigation
- PIL) की अवधारणा न्यायिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है:
लचीलापन: पीआईएल के तहत लोक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi
- यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का नियम) को शिथिल किया गया है।
दायरा: इसके तहत कोई भी जिम्मेदार नागरिक या सामाजिक संगठन जनता के किसी वर्ग के अधिकारों के हनन या जनहित के मुद्दों पर अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है, भले ही वह व्यक्ति स्वयं उस मामले से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न हो।
अतः इस संबंध में सबसे सटीक कथन
- (A) है।
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