Banking · Digital Banking & RBI Guidelines
भारत में खुदरा बैंकिंग के डिजिटलाइजेशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: CBDC-रिटेल (e-₹) उस वाणिज्यिक बैंक की प्रत्यक्ष देनदारी है जो ग्राहक को डिजिटल वॉलेट जारी करता है, जैसा कि एक पारंपरिक बचत खाते में रखी गई शेष राशि होती है। कथन II: डिजिटल ऋण उत्पादों को RBI के 'डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस' का पालन करना अनिवार्य है, जो यह निर्धारित करता है कि सभी ऋण संवितरण और पुनर्भुगतान सीधे बैंक के खाते और उधारकर्ता के खाते के बीच बिना किसी तीसरे पक्ष के पूल खाते के निष्पादित किए जाने चाहिए। कथन III: भारत में नियोबैंक (Neobanks) पूर्णतः लाइसेंस प्राप्त बैंकिंग संस्थाएं हैं जो बिना किसी भौतिक शाखा के विशेष रूप से ऑनलाइन काम करती हैं, जिन्हें विशेष 'नियोबैंकिंग अधिनियम' के तहत सीधे विनियमित किया जाता है। कथन IV: 'की फैक्ट Statement' (KFS) एक अनिवार्य डिजिटल दस्तावेज है जिसे ऋण समझौते निष्पादन से पहले खुदरा उधारकर्ता को प्रदान किया जाना चाहिए, जिसमें वार्षिक प्रतिशत दर (APR) सहित ऋण की कुल लागत दर्ज होती है। कथन V: 'यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस' (ULI) के तहत, RBI का उद्देश्य खुदरा और कृषि ऋणों के मूल्यांकन में तेजी लाने के लिए विभिन्न राज्यों के भूमि रिकॉर्ड सहित डिजिटल जानकारी का निर्बाध प्रवाह प्रदान करना है। उपरोक्त कथनों में से कौन से कथन सही हैं?
- 1सभी कथन सही हैं।
- 2केवल II, IV और V✓
- 3केवल II और III
- 4केवल I और II
सही उत्तर देखें
केवल II, IV और V
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