History · Bhakti Movement
भक्ति आंदोलन की सगुण धारा के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा समूह पूर्णतः कृष्ण-भक्ति संतों का है?
- 1निम्बार्क, वल्लभाचार्य, चैतन्य और सूरदास✓
- 2शंकराचार्य, माध्वाचार्य और रामानुजाचार्य
- 3रामानुज, रामानंद, तुलसीदास और नाभादास
- 4कबीर, नानक, रैदास और दादू दयाल
सही उत्तर देखें
निम्बार्क, वल्लभाचार्य, चैतन्य और सूरदास
व्याख्या
भक्ति आंदोलन की सगुण धारा के अंतर्गत कृष्ण-भक्ति संतों का पूर्ण समूह
- (D) निम्बार्क, वल्लभाचार्य, चैतन्य और सूरदास है।
मुख्य बिंदु:
निम्बार्काचार्य: इन्होंने 'द्वैताद्वैतवाद' (भेदाभेदवाद) की स्थापना की और कृष्ण-भक्ति के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वल्लभाचार्य: इन्होंने 'शुद्धाद्वैतवाद' मत का प्रतिपादन किया और पुष्टिमार्ग के संस्थापक के रूप में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं की उपासना पर बल दिया।
महाप्रभु चैतन्य: बंगाल में कृष्ण-भक्ति (गौड़ीय संप्रदाय) के प्रमुख संत और प्रचारक थे, जिन्होंने हरिनाम संकीर्तन को अत्यधिक लोकप्रिय बनाया।
महाकवि सूरदास: अष्टछाप के प्रमुख कवि और वल्लभाचार्य के शिष्य थे, जिन्होंने कृष्ण के बाल और युवा स्वरूप का अत्यंत सजीव व मार्मिक वर्णन किया है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प
- (A) के संत (कबीर, नानक, रैदास, दादू) 'निर्गुण' धारा से संबंधित हैं; विकल्प
- (B) के तुलसीदास और नाभादास राम-भक्ति शाखा से जुड़े हैं; और विकल्प
- (C) के आचार्य मुख्य रूप से वेदांत दर्शन के विभिन्न मतों के संस्थापक हैं।
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