History · Ancient Indian History
प्राचीन भारतीय समाज में 'आश्रम' शब्द का तात्पर्य किससे है?
- 1विवाह का एक रूप
- 2एक प्रकार का कर
- 3जीवन के चरण✓
- 4एक धार्मिक संप्रदाय
सही उत्तर देखें
जीवन के चरण
व्याख्या
प्राचीन भारतीय समाज में 'आश्रम' शब्द का तात्पर्य जीवन के चरणों से है।
जीवन के चरण (आश्रम व्यवस्था): प्राचीन भारतीय समाज में मानव जीवन को 100 वर्ष की आयु मानकर चार बराबर भागों में बांटा गया था, जिन्हें 'चार आश्रम' कहा गया।
चार चरण:
ब्रह्मचर्य आश्रम: शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति की अवस्था (लगभग 0 से 25 वर्ष)।
गृहस्थ आश्रम: विवाह करके पारिवारिक जीवन और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन (लगभग 25 से 50 वर्ष)।
वानप्रस्थ आश्रम: परिवार और मोह-माया से विरक्त होकर समाज सेवा और वन की ओर प्रस्थान (लगभग 50 से 75 वर्ष)।
संन्यास आश्रम: ईश्वर की आराधना और मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण त्याग (लगभग 75 से 100 वर्ष)।
उद्देश्य: इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) की प्राप्ति को सुनिश्चित करना था।
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