History · Ancient Indian History
प्राचीन भारतीय इतिहास में 'त्रिमूर्ति' की अवधारणा मुख्य रूप से किस काल से संबंधित है?
- 1सिंधु घाटी सभ्यता
- 2वैदिक काल
- 3गुप्त काल✓
- 4मौर्य काल
सही उत्तर देखें
गुप्त काल
व्याख्या
प्राचीन भारतीय इतिहास में 'त्रिमूर्ति' (ब्रह्मा, विष्णु और महेश/शिव) की अवधारणा मुख्य रूप से गुप्त काल से संबंधित है।
धार्मिक विकास: गुप्त काल में वैदिक धर्म का रूपांतरण पौराणिक हिंदू धर्म में हुआ, जिसके तहत त्रिदेवों—ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालनहार) और शिव (संहारकर्ता)—की संकल्पना को मजबूती मिली।
मूर्तिकला और मंदिर: इस काल में वास्तुकला और मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ। मध्य प्रदेश के एरण, देवगढ़ (दश अवतार मंदिर) और Elephanta (एलीफेंटा की गुफाएं
- मुख्य रूप से बाद के काल में परिपक्व) जैसी जगहों पर त्रिमुर्ती और पौराणिक देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां बनाई गईं।
भागवत धर्म का उत्थान: गुप्त शासक स्वयं वैष्णव अनुयायी थे और उन्होंने 'परम भागवत' की उपाधि धारण की थी, जिससे हिंदू धर्म के मुख्य देवताओं की त्रिमूर्ति की यह अवधारणा समाज में सर्वमान्य रूप से स्थापित हुई।
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