Indian Polity · Local Self Government
पंचायतों और नगरपालिकाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण किस आधार पर प्रदान किया जाता है?
- 1जनसंख्या की परवाह किए बिना समान प्रतिनिधित्व
- 2केंद्र सरकार के निर्देशों पर
- 3राज्य सरकार के विवेक पर
- 4उनकी जनसंख्या✓
सही उत्तर देखें
उनकी जनसंख्या
व्याख्या
स्पष्टीकरण:
पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों) तथा शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं, नगर निगमों) में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए सीटों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होता है।
मुख्य बिंदु:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243D (पंचायतों के लिए) और अनुच्छेद 243T (नगरपालिकाओं के लिए) के अनुसार, प्रत्येक पंचायत या नगरपालिका में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं।
यह आरक्षण उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के अनुपात के लगभग समान होता है।
इसी प्रकार, पंचायतों और नगरपालिकाओं के अध्यक्षों के पदों पर भी इन वर्गों के लिए जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
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