Geography · Aeolian Landforms
निम्नलिखित में से कौन सी प्रक्रिया मुख्य रूप से बालुका स्तूप (रेत के टीले) के आगे बढ़ने या विस्थापन को दर्शाती है?
- 1जलीय अपरदन टीले के आधार को खिसका देता है जिससे उसकी चोटी आगे की ओर गिर जाती है।
- 2उच्च वेग वाले धूल भरे तूफानों के दौरान पूरा टीला ऊपर उठ जाता है और आगे जाकर स्थापित होता है।
- 3तेज हवाओं के दौरान रेत बिना पवनोन्मुख ढाल को छुए सीधे चोटी के पार उड़ जाती है।
- 4रेत मंद पवनोन्मुख ढाल से ऊपर की ओर ले जाई जाती है और तीव्र अनुवात ढाल (slip face) पर नीचे सरकती है।✓
सही उत्तर देखें
रेत मंद पवनोन्मुख ढाल से ऊपर की ओर ले जाई जाती है और तीव्र अनुवात ढाल (slip face) पर नीचे सरकती है।
व्याख्या
सही उत्तर:
- (A) रेत मंद पवनोन्मुख ढाल से ऊपर की ओर ले जाई जाती है और तीव्र अनुवात ढाल (slip face) पर नीचे सरकती है।
मुख्य बिंदु एवं स्पष्टीकरण:
स्तूप का विस्थापन: मरुस्थलों में बालुका स्तूप स्थिर नहीं रहते, बल्कि हवा के साथ आगे बढ़ते रहते हैं।
क्रियाविधि: हवा मंद पवनोन्मुख ढाल के सहारे रेत के महीन कणों को ऊपर की चोटी तक धकेलती है। जब ये कण चोटी को पार करते हैं, तो वे अनुवात ढाल (Slip face) पर नीचे की ओर फिसल जाते हैं। इस निरंतर प्रक्रिया के कारण पूरा टीला धीरे-धीरे पवन की दिशा में आगे खिसकता जाता है।
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