Law · Negotiable Instruments & RBI Act
कथन 1: विनिमय पत्र (bill of exchange) एक औपचारिक लिखित दस्तावेज है जहां परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत लेखक (drawer) अदाकर्ता (drawee) को आदाता (payee) को एक निश्चित राशि का भुगतान करने का निर्देश देता है। कथन 2: जब कोई बैंक यूसेंस बिल (usance bill) को भुनाता है, तो वह प्रभावी रूप से उसके अंकित मूल्य से कम कीमत पर ऋण खरीदता है, जिससे तत्काल तरलता मिलती है। कथन 3: भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 31 के तहत, आरबीआई या केंद्र सरकार के अलावा कोई भी व्यक्ति मांग पर धारक को देय (payable to bearer on demand) कोई विनिमय पत्र या वचन पत्र तैयार, स्वीकार या जारी नहीं कर सकता है। इन कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सारांश सबसे सटीक है?
- 1कथन 3 एकमात्र सत्य कथन है क्योंकि अन्य दो स्टैम्प ड्यूटी का उल्लेख करने में विफल रहे हैं।
- 2केवल कथन 2 सत्य है, जबकि कथन 1 और कथन 3 असत्य हैं।
- 3तीनों कथन सत्य हैं, जो परिभाषा, वाणिज्यिक उपयोगिता और धारक मांग लिखतों पर वैधानिक प्रतिबंधों को उजागर करते हैं।✓
- 4कथन 1 और 2 सत्य हैं, लेकिन कथन 3 असत्य है क्योंकि धारा 31 केवल वचन पत्रों पर लागू होती है।
सही उत्तर देखें
तीनों कथन सत्य हैं, जो परिभाषा, वाणिज्यिक उपयोगिता और धारक मांग लिखतों पर वैधानिक प्रतिबंधों को उजागर करते हैं।
Download Single Question PDF
Save this question and verified answer as a clean study sheet with live clickable link.
Share with Friends & Study Groups
Challenge your peer aspirants on WhatsApp or Telegram to solve this question!
Preparing for Law?
Practice full-length mock tests with real exam timers, instant score analysis, and all-India ranking.
Want more practice questions on Negotiable Instruments & RBI Act?
Solve complete topic-wise tests with detailed solutions on GkGet.
Related Practice Questions
Recommended practice questions in Law · Negotiable Instruments & RBI Act