Law · Indian Contract Act, 1872
कथन 1: गारंटी के अनुबंध के तहत, प्रतिभू (surety) को प्रस्थापन (subrogation) का अधिकार होता है, जिसका अर्थ है कि गारंटीकृत ऋण के भुगतान या उस सभी के प्रदर्शन पर जिसके लिए वह उत्तरदायी है, प्रतिभू को वे सभी अधिकार प्राप्त हो जाते हैं जो लेनदार के पास मुख्य ऋणी के विरुद्ध थे। यह संरक्षण भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 की धारा 141 द्वारा प्रदान किया गया है। कथन 2: अधिनियम की धारा 145 में निर्धारित किए गए अनुसार, मुख्य ऋणी गारंटी के तहत उचित रूप से भुगतान की गई सभी राशियों के लिए प्रतिभू की क्षतिपूर्ति करने के लिए एक विवक्षित दायित्व के अधीन है। हालांकि, प्रतिभू मुख्य ऋणी से 'गलत तरीके से' भुगतान की गई किसी भी राशि को वसूल नहीं कर सकता है। कथन 3: धारा 133 के अनुसार, मुख्य ऋणी और लेनदार के बीच अनुबंध की शर्तों में प्रतिभू की सहमति के बिना किया गया कोई भी परिवर्तन, प्रतिभू को उस परिवर्तन के बाद के लेन-देन से मुक्त कर देता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 के तहत एक प्रतिभू को दिए जाने वाले समग्र कानूनी संरक्षण का सारांश प्रस्तुत करता है?
- 1कथन 1, कथन 2 और कथन 3 सही हैं।✓
- 2कथन 1 और कथन 2 सही हैं।
- 3कथन 3 गलत है क्योंकि परिवर्तन (variance) द्वारा प्रतिभू कभी भी मुक्त नहीं होता है।
- 4कथन 2 गलत है क्योंकि यदि एक सह-प्रतिभू को मुक्त किया जाता है तो सभी सह-प्रतिभू हमेशा मुक्त हो जाते हैं।
सही उत्तर देखें
कथन 1, कथन 2 और कथन 3 सही हैं।
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