Accounting · Ratio Analysis
ऋण-अंशपूंजी (Debt-to-Equity) अनुपात के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: कथन 1: उद्योग के सामान्य स्तर से काफी अधिक ऋण-अंशपूंजी अनुपात यह बताता है कि कंपनी को आर्थिक मंदी के दौरान निश्चित दायित्वों के कारण वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। कथन 2: कम ऋण-अंशपूंजी अनुपात वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है, लेकिन यह यह भी संकेत दे सकता है कि प्रबंधन वित्तीय उत्तोलन (financial leverage) के लाभों का फायदा उठाने में विफल रहा है। कथन 5: एक सफल ऋण-इक्विटी स्वैप (debt-for-equity swap) से इसके ऋण-अंशपूंजी अनुपात में तत्काल सुधार (कमी) देखा जाएगा क्योंकि कुल देनदारियां घटती हैं और शेयर पूंजी बढ़ती है। कथन 6: ऋण-अंशपूंजी अनुपात को ऑफ-बैलेंस-शीट वित्तपोषण तकनीकों, जैसे कि परिचालन पट्टों (operating leases) द्वारा कृत्रिम रूप से कम किया जा सकता है। कथन 7: दीर्घकालिक शोधन क्षमता का व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए, ऋण-अंशपूंजी अनुपात को ब्याज कवरेज अनुपात (Interest Coverage Ratio) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। इन कथनों का निम्नलिखित में से कौन सा मूल्यांकन सटीक है?
- 1कथन 1, 2, 4, और 7 सही हैं।
- 2सभी कथन सही हैं।
- 3कथन 1, 3, 4, और 5 सही हैं।
- 4कथन 1, 2, 5, 6, और 7 सही हैं।✓
सही उत्तर देखें
कथन 1, 2, 5, 6, और 7 सही हैं।
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