History · Vedic Period Religion
ऋग्वैदिक परंपरा में, रुद्र देवता का मुख्य रूप से किस रूप में वर्णन किया गया है, और बाद में पौराणिक काल में उनकी पहचान किस प्रमुख देवता के साथ की गई थी?
- 1शिल्प और वास्तुकला के देवता; बाद में विश्वकर्मा के साथ पहचान की गई
- 2ब्रह्मांडीय व्यवस्था के देवता; बाद में वरुण के साथ पहचान की गई
- 3अग्नि और चूल्हे के देवता; बाद में अग्नि के साथ पहचान की गई
- 4पशुओं और तूफ़ान के देवता; बाद में शिव के साथ पहचान की गई✓
सही उत्तर देखें
पशुओं और तूफ़ान के देवता; बाद में शिव के साथ पहचान की गई
व्याख्या
विस्तृत स्पष्टीकरण:
वैदिक धर्म और इतिहास में रुद्र देवता का विशेष स्थान है।
ऋग्वैदिक रूप: ऋग्वैदिक परंपरा में रुद्र को मुख्य रूप से पशुओं (पशुपति) और तूफ़ान के देवता के रूप में वर्णित किया गया है, जो अपनी उग्र प्रकृति और चिकित्सा संबंधी गुणों के लिए जाने जाते थे।
पौराणिक पहचान: उत्तर वैदिक और पौराणिक काल में धीरे-धीरे इनका रूपांतरण हुआ और इनकी पहचान शिव (महादेव) के साथ की गई, जो संहार और कल्याण के देवता के रूप में पूजे जाने लगे।
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