History · Ancient Indian History
उत्तरवैदिक काल के मृदभांडों में किस प्रकार का मृदभांड सर्वोपरि वैशिष्ट्य सूचक है?
- 1गेरूवर्णी मृदभांड (OCP)
- 2उत्तरी काली चमकीली मृदभांड (NBPW)
- 3चित्रित धूसर मृदभांड (Painted Grey Ware)✓
- 4कृष्ण-लोहित मृदभांड (Black and Red Ware)
सही उत्तर देखें
चित्रित धूसर मृदभांड (Painted Grey Ware)
व्याख्या
उत्तर:
- (B) चित्रित धूसर मृदभांड (Painted Grey Ware)
विस्तृत स्पष्टीकरण और मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक संदर्भ: उत्तरवैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व) भारतीय इतिहास में लोहे के व्यापक प्रयोग और आर्यों के पूर्व की ओर गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में विस्तार का काल माना जाता है।
प्रमुख मृदभांड: इस काल की संस्कृतियों की पहचान मुख्य रूप से 'चित्रित धूसर मृदभांड' (PGW
- Painted Grey Ware) संस्कृति से की जाती है। यह इस काल का सबसे प्रमुख और सर्वोपरि वैशिष्ट्य सूचक (Characteristic Feature) मृदभांड है।
विशेषताएं: इन बर्तनों की मिट्टी बहुत बारीक होती थी और इन पर काले रंग से ज्यामितीय आकृतियों, चक्रों और पट्टियों के चित्र उकेरे जाते थे।
अन्य विकल्प:
- (A) कृष्ण-लोहित मृदभांड (BRW) पाषाण-ताम्रकाल और प्रारंभिक लौह काल से जुड़े हैं।
- (C) उत्तरी काली चमकीली पॉलिश वाले बर्तन (NBPW) मौर्य काल के आसपास मुख्य रूप से प्रसिद्ध हुए।
- (D) गेरूवर्णी मृदभांड (OCP) हड़प्पा सभ्यता के उत्तरवर्ती काल या पूर्व-हड़प्पा काल से संबंधित हैं।
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