Religion · Buddhism and Jainism
आष्टांगिक मार्ग की संकल्पना, किसका अंग है?
- 1D) कुण्डलवन, कश्मीर
- 2C) कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धान्त सही हैं
- 3B) नागसेन
- 4A) धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त के विषयवस्तु का✓
Correct answer
A) धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त के विषयवस्तु का
Explanation
सही उत्तर:
- (A) A) धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त के विषयवस्तु का
विस्तृत स्पष्टीकरण:
संकल्पना का आधार: आष्टांगिक मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) की संकल्पना बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है, जो धर्मचक्रप्रवर्तन सुत्त की विषयवस्तु का एक प्रमुख अंग है।
मध्यम मार्ग: इसे 'मध्यम मार्ग' या 'मझिम प्रतिपदा' भी कहा जाता है, क्योंकि यह अत्यधिक भोग-विलासिता और अत्यधिक कायाकलेश (कठोर तपस्या) दोनों के मध्य का मार्ग है।
आठ अंग: इस मार्ग के आठ भाग हैं—सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि।
महत्व: महात्मा बुद्ध ने सारनाथ में अपने पहले उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) के दौरान दुखों से मुक्ति पाने और निर्वाण प्राप्त करने के लिए इन आठ मार्गों का उपदेश दिया था।
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