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25वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1971 ने राज्य के संपत्ति अधिग्रहण कानूनों पर न्यायपालिका की शक्ति को कैसे प्रभावित किया?
- 1यह अनिवार्य करता है कि सभी संपत्ति अधिग्रहण मामलों की सुनवाई एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा की जानी चाहिए।
- 2इसने न्यायालयों को किसी भी भूमि सीमा विवाद पर स्थगन आदेश जारी करने से रोक दिया।
- 3इसने अधिग्रहीत संपत्ति के मुआवजे की पर्याप्तता पर सवाल उठाने के लिए न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया।✓
- 4इसने न्यायिक समीक्षा की शक्ति को उच्च न्यायालयों से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया।
सही उत्तर देखें
इसने अधिग्रहीत संपत्ति के मुआवजे की पर्याप्तता पर सवाल उठाने के लिए न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया।
व्याख्या
सही उत्तर:
- (B) इसने अधिग्रहीत संपत्ति के मुआवजे की पर्याप्तता पर सवाल उठाने के लिए न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया।
विस्तृत स्पष्टीकरण:
न्यायिक समीक्षा पर प्रतिबंध: 25वें संशोधन से पहले, यदि सरकार किसी संपत्ति का अधिग्रहण करती थी और उसके बदले में मालिक को कम मुआवजा मिलता था, तो अदालतें यह तय करती थीं कि मुआवजा पर्याप्त (Adequate) है या नहीं।
संशोधन का प्रभाव: इस संशोधन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण पर दिया जाने वाला मुआवजा पर्याप्त है या नहीं, इस आधार पर अदालतों में उसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
मुख्य बिंदु: इसने संसद और राज्य सरकारों को सामाजिक कल्याण के लिए निजी संपत्ति के अधिग्रहण के मामलों में अधिक स्वायत्तता प्रदान की।
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