Current Affairs · State Policies & Legal Disputes
2002 में स्थापित 'झारखंड राज्य वन विकास निगम' (JSFDC) को 2025 में 'लघु वन उपज (MFP) के व्यापार' के संबंध में एक बड़ी नीतिगत चुनौती का सामना करना पड़ा। इस चुनौती को सबसे अच्छी तरह परिभाषित किया जा सकता है:
- 1कोल्ड-स्टोरेज सुविधाओं की कमी जिसके कारण 2025 के सीजन में संथाल परगना में एकत्रित 60% इमली और शहद बर्बाद हो गया।
- 2हजारीबाग पठार के आरक्षित वन क्षेत्रों में साल के पेड़ों की व्यावसायिक कटाई पर 2024 के प्रतिबंध के बाद JSFDC का पूर्ण रूप से दिवालिया होना।
- 3पेसा (PESA) अधिनियम 1996 और वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत ग्राम सभा या JSFDC के पास 'केन्दू पत्तों' को इकट्ठा करने और नीलाम करने का 'प्राथमिक अधिकार' है या नहीं, इस पर एक कानूनी विवाद।✓
- 4केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए 'डिजिटल हाट' प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा करने में निगम की असमर्थता, जो आदिवासी संग्राहकों को महुआ सीधे अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों को बेचने की अनुमति देता है।
सही उत्तर देखें
पेसा (PESA) अधिनियम 1996 और वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत ग्राम सभा या JSFDC के पास 'केन्दू पत्तों' को इकट्ठा करने और नीलाम करने का 'प्राथमिक अधिकार' है या नहीं, इस पर एक कानूनी विवाद।
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