Economics · Composition of India's Foreign Trade
1951 में नियोजित विकास की शुरुआत के बाद के शुरुआती दशकों में भारत के आयात प्रोफाइल की प्राथमिक संरचनात्मक विशेषता क्या थी?
- 1विशेष रूप से प्राथमिक वस्तुओं और खनिजों के आयात की ओर बदलाव
- 2खाद्यान्न और कृषि आदानों के आयात पर पूर्ण रोक
- 3निर्मित उपभोक्ता वस्तुओं और विलासिता के सामानों के आयात में भारी वृद्धि
- 4औद्योगिकीकरण के कारण पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल के आयात में तीव्र वृद्धि✓
सही उत्तर देखें
औद्योगिकीकरण के कारण पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल के आयात में तीव्र वृद्धि
व्याख्या
वर्ष 1951 में भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से नियोजित आर्थिक विकास (Planned Development) की शुरुआत की गई थी।
औद्योगिकीकरण की प्राथमिकता: शुरुआती दशकों में सरकार का मुख्य ध्यान देश में भारी उद्योगों की स्थापना और तीव्र औद्योगिकीकरण पर था।
आयात प्रोफाइल पर प्रभाव: इस औद्योगिक आधार को तैयार करने के लिए भारी मशीनों, कारखानों के उपकरणों (पूंजीगत वस्तुओं) और उनके लिए आवश्यक कच्चे माल के आयात में तेजी से वृद्धि हुई, क्योंकि उस समय देश में इन वस्तुओं का पर्याप्त घरेलू उत्पादन नहीं होता था।
निष्कर्ष: इसलिए, इस काल की मुख्य विशेषता औद्योगिकीकरण के कारण पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल के आयात में तीव्र वृद्धि थी, जिसके चलते विकल्प
- (A) सही है।
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