History · Educational Committees and Commissions
1902 के भारतीय विश्वविद्यालय आयोग का प्राथमिक उद्देश्य क्या था?
- 1उच्च शिक्षा का नियंत्रण पूरी तरह से भारतीय स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करना
- 2स्कूली पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों का पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षीकरण करना
- 3सार्वभौमिक अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के लिए एक नीति शुरू करना
- 4ब्रिटिश भारत में स्थापित विश्वविद्यालयों की स्थिति और संभावनाओं की जांच करना और सुधारों की सिफारिश करना✓
सही उत्तर देखें
ब्रिटिश भारत में स्थापित विश्वविद्यालयों की स्थिति और संभावनाओं की जांच करना और सुधारों की सिफारिश करना
व्याख्या
प्रश्न: 1902 के भारतीय विश्वविद्यालय आयोग का प्राथमिक उद्देश्य क्या था?
सही उत्तर:
- (A) ब्रिटिश भारत में स्थापित विश्वविद्यालयों की स्थिति और संभावनाओं की जांच करना और सुधारों की सिफारिश करना
विस्तृत स्पष्टीकरण:
पृष्ठभूमि: इस आयोग का गठन लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल में किया गया था, जिसके अध्यक्ष सर थॉमस रैले थे, इसलिए इसे 'रैले आयोग' भी कहा जाता है।
मुख्य उद्देश्य: इसका मुख्य कार्य भारत में, विशेषकर कलकत्ता विश्वविद्यालय को केंद्र में रखते हुए, उस समय के विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, उनकी स्थिति और संभावनाओं की गहन जांच करना तथा उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए आवश्यक उपाय व सिफारिशें प्रस्तुत करना था।
परिणाम: इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही वर्ष 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित किया गया, जिसके तहत विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण काफी बढ़ा दिया गया था।
Download Single Question PDF
Save this question and verified answer as a clean study sheet with live clickable link.
Share with Friends & Study Groups
Challenge your peer aspirants on WhatsApp or Telegram to solve this question!
Preparing for History?
Practice full-length History mock tests with real exam timers, instant score analysis, and all-India ranking.
Want more practice questions on Educational Committees and Commissions?
Solve complete topic-wise tests with detailed solutions on GkGet.
Related Practice Questions
Recommended practice questions in History · Educational Committees and Commissions